
कुल्लू। हिमालय नीति अभियान के तहत 24 मई से बंजार के शाईरोपा में तीन दिवसीय देशव्यापी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन में हिमाचल प्रदेश में वन अधिकार कानून 2006 को लागू करने में जल विद्युत परियोजनाओं व वन विभाग के दबाव होने से हो रहे विलंब को लेकर चर्चा की जाएगी। सम्मेलन में देश भर से 50 व प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के 150 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसके लिए हिमाचल सरकार, राजनैतिक दलों व सामाजिक संगठनों को भी न्योता दिया गया है ताकि आम सहमति बन सके। हिमालय नीति अभियान के अध्यक्ष कुलभूषण उपमन्यु ने कहा कि वनाधिकार कानून-2006 जनवरी 2008 से पूरे देश में लागू है परंतु हिमाचल प्रदेश की पिछली सरकार ने इसे जानबूझ कर अमल में नहीं लाया। अप्रैल 2008 को पहले चरण में प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में यह कानून लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, बावजूद इसके अभी तक अधिकारों के हस्तांतरण का काम अधूरा पड़ा है। जन दबाव व केंद्रीय सरकार के बार-बार स्पष्टीकरण देने के बाद 27 मार्च 2012 को प्रदेश सरकार ने गैर आदिवासी इलाकों में अन्य वन निवासी श्रेणी के लिए इस कानून को लागू करने के आदेश जारी किए और जिला व उपमंडल स्तर की वन अधिकार समितियों के गठन के आदेश सभी जिलाधीशों को जारी किए गए परंतु एक साल बीतने पर भी इन समितियों का गठन नहीं हो पाया है। अध्यक्ष कुलभूषण उपमन्यु व संयोजक गुमान सिंह ने कहा कि सम्मेलन में कई मुद्दों पर विचार विमर्श किया जाएगा।
